तू स्त्री है!

Tu Stri Hai

तू बून्द सी शीतल है,
तू पंख सी नरम है,
तू फूलों की कली है,
तू पवन की कश्ती है।

कभी तू नटखट सी होती है,
कभी तू बेचैन सी होती है,
कभी तू वृक्ष सी शांत होती है,
कभी तू मन सी चंचल भी होती है,
कभी तू हस्ती है तो कभी तू रोती है।

तू गीत है पक्षियों का,
तू नृत्य है कलाओं का,
तू सूर्य की किरण भी है,
तू चंद्र की चांदनी भी है।

प्रेम की भाषा है तू,
ह्रदय की भावना है तू,
दया का मार्ग है तू,
जीवन का कारण है तू।

तू नदी सी बेहती है,
सागर में मिल जाती है,
जो तुजमे नहीं समाता,
उसमे भी तू समा जाती है।

तू स्त्री है!

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